ज्योतिषशास्त्र में हस्तरेखा विज्ञान का भी बहुत महत्व है. सही-गलत के बारे में मुझे टिप्पणी नहीं करना है क्योंकि सबके अनुभव अलग-अलग होंगे, हाँ, श्री मधु चिपड़े को किसी भी व्यक्ति के हाथ को देखते ही उन्हें ऐसे संकेत मिलने लगते थे जो हस्तरेखाविज्ञान की सीमाओं से भी परे होते थे.
वे सहृदय व्यक्ति थे, शिक्षक थे, अभाव में जीवनयापन करते थे लेकिन उन्होंने कभी किसी से अपने उस हुनर का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भुगतान नहीं लिया. वे सच्चे मायने में एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सक थे, जो उनके पास आता था, उसको हिम्मत और उचित मार्गदर्शन देकर खुश करके विदा करते थे. उनकी भविष्यवाणियों की कुछ घटनाएं आपको बता सकता हूँ जो आपको आश्चर्य में डाल देंगी.
मधुकरराव चिपड़े ने बनारस के हिन्दू विश्वविद्यालय से ज्योतिष की शिक्षा ग्रहण की थी। हस्तरेखाओं के अध्ययन में उनकी रुचि थी इसलिए बिलासपुर के छत्तीसगढ़ स्कूल में मास्टरी करते-करते शौकिया तौर पर लोगों की हस्तरेखाओं को देखकर उनका भूत-भविष्य बताते थे।
अरपा नदी के पुल के उस पार मोहल्ला सरकंडा में उनका पुश्तैनी मकान था, उसमें निवास करते थे। किसी एक दिन की बात है, एक सिंधी सज्जन उनको अपना 'हाथ' दिखने आए, मधु चिपड़े ने हाथ देखा और उससे पूछा- 'अरे, तुम ज़िन्दा हो ?'
'ज़िन्दा हूँ तब ही तो आपके सामने बैठा हूँ।' उसने कहा।
'सड़क में सावधानी से चला करो, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखो।' चिपड़े जी ने सलाह दी और उसे विदा कर दिया। मात्र दो मिनट बाद वह व्यक्ति उनके घर से कुछ दूर स्थित अरपा नदी के पुल पर एक ट्रक से टकराया और 'स्पाट' में ही काल-कलवित हो गया।
मधु चिपड़े ने मुझे बताया- उस भविष्यवाणी से मैं बहुत दुखी हो गया और निर्णय लिया कि कभी भी किसी को अनहोनी के बारे में नहीं बताऊंगा।'
'क्या रेखाएँ भविष्य का संकेत देती है ?' मैंने उनसे पूछा।
'हस्तरेखा विज्ञान सटीक है लेकिन कई बार चूक हो जाती है।'
'कैसे ?'
'मोहल्ले के एक महाराष्ट्रीयन सज्जन मुझे हाथ दिखने आए, सब ठीक-ठाक दिखा, मैंने उन्हें अच्छी बातें कह कर विदा किया लेकिन उसी रात वे संसार से विदा हो गए।'
'अरे !'
'हाँ, मैं उनके अंतिम संस्कार में गया, कई दिनों तक बेचैन रहा कि उनकी मृत्यु के कोई संकेत रेखाओं में नहीं थे, फिर ऐसा क्यो हुआ ? मुझे इस विज्ञान पर ही संदेह होने लगा।'
'फिर ?'
'जिस दिन गंगापूजन का कार्यक्रम था, मैं उनके घर गया और बहुत झिझकते हुए उनकी पत्नी से हाथ दिखने के लिए अनुरोध किया, उन्होंने अपना हाथ दिखा। उनके हाथ की रेखाओं में वैधव्य का प्रबल संकेत था। इससे यह समझ में आया कि केवल व्यक्ति की रेखाएँ ही नहीं, उससे जुड़े अन्य व्यक्तियों के भवितव्य का भी बहुत प्रभाव होता है।' चिपड़े जी ने बताया।
उनकी बात का विश्वास करने और उनका आदर करने वालों की संख्या बताना असंभव हैं। माधुरी ने उनके साथ पाँच-छः 'सिटिंग' की। वहाँ उन्हें अनेक व्यक्ति, विभिन्न चरित्र, किस्म-किस्म के हाथ और विविध समस्याओं को सुनने-समझने का अवसर मिला। घरेलू व्यस्तता के चलते उन्होंने चिपड़े जी के घर जाना छोड़ दिया और कुछ समय बाद हस्तरेखा का अध्ययन भी त्याग दिया। उनका आकलन था- 'चिपड़े जी के पास अधिकतर समस्याग्रस्त लोग आते हैं और उनसे मिलकर अपने चेहरे पर राहत का भाव लेकर वापस लौटते हैं । वे केवल हस्तरेखा विशेषज्ञ नहीं हैं, वे एक 'सोशल वर्कर' हैं, कुशल मनोवैज्ञानिक चिकित्सक हैं।'
मेरी उनसे अक्सर मुलाक़ात होती थी, लेकिन हर बार उनके सामने अपना हाथ नहीं बढ़ाता था। कभी कोई गंभीर समस्या सर पर आ जाती थी तब ही उनका मार्गदर्शन लेता। उन्होने मेरे 28 वर्ष की आयु में विवाह होने की भविष्यवाणी की थी, केवल वही सही निकली, शेष गलत। मेरे विवाह के बाद मैंने उनसे पूछा था- 'आठ वर्ष पूर्व आपने मेरा हाथ देखकर बताया था कि मेरा विवाह हो चुका है और एक बच्चा भी, लेकिन वह दोनों बात गलत थी, ऐसा कैसे हुआ ?'
'मुझे याद है, तुम्हारी रेखाएँ वही बता रही थी। संभवतः तुम्हारे पुण्य कार्यों के कारण वह विवाह नहीं हुआ। यदि वह विवाह हो गया होता तो तुम्हें अपनी पहली पत्नी की मृत्यु का वियोग सहना पड़ता, वैसे संकेत तुम्हारे हाथ में थे।' उन्होंने रहस्योद्घाटन किया।
उन्होंने अपने जीवनकाल के 50 वर्षों तक लोगों के हाथ देखकर जनसेवा की और कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया। उनकी प्रतिभा और ज्ञान के बारे में कितना लिखूं ? फिलहाल समझने के लिए आपको यह बता रहा हूँ कि वे आधुनिक त्रिकालदर्शी थे।
मधुकर राव चिपड़े अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके मुरीद उन्हें अब भी बेहद शिद्दत से याद करते हैं।
============
वे सहृदय व्यक्ति थे, शिक्षक थे, अभाव में जीवनयापन करते थे लेकिन उन्होंने कभी किसी से अपने उस हुनर का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भुगतान नहीं लिया. वे सच्चे मायने में एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सक थे, जो उनके पास आता था, उसको हिम्मत और उचित मार्गदर्शन देकर खुश करके विदा करते थे. उनकी भविष्यवाणियों की कुछ घटनाएं आपको बता सकता हूँ जो आपको आश्चर्य में डाल देंगी.
मधुकरराव चिपड़े ने बनारस के हिन्दू विश्वविद्यालय से ज्योतिष की शिक्षा ग्रहण की थी। हस्तरेखाओं के अध्ययन में उनकी रुचि थी इसलिए बिलासपुर के छत्तीसगढ़ स्कूल में मास्टरी करते-करते शौकिया तौर पर लोगों की हस्तरेखाओं को देखकर उनका भूत-भविष्य बताते थे।
अरपा नदी के पुल के उस पार मोहल्ला सरकंडा में उनका पुश्तैनी मकान था, उसमें निवास करते थे। किसी एक दिन की बात है, एक सिंधी सज्जन उनको अपना 'हाथ' दिखने आए, मधु चिपड़े ने हाथ देखा और उससे पूछा- 'अरे, तुम ज़िन्दा हो ?'
'ज़िन्दा हूँ तब ही तो आपके सामने बैठा हूँ।' उसने कहा।
'सड़क में सावधानी से चला करो, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखो।' चिपड़े जी ने सलाह दी और उसे विदा कर दिया। मात्र दो मिनट बाद वह व्यक्ति उनके घर से कुछ दूर स्थित अरपा नदी के पुल पर एक ट्रक से टकराया और 'स्पाट' में ही काल-कलवित हो गया।
मधु चिपड़े ने मुझे बताया- उस भविष्यवाणी से मैं बहुत दुखी हो गया और निर्णय लिया कि कभी भी किसी को अनहोनी के बारे में नहीं बताऊंगा।'
'क्या रेखाएँ भविष्य का संकेत देती है ?' मैंने उनसे पूछा।
'हस्तरेखा विज्ञान सटीक है लेकिन कई बार चूक हो जाती है।'
'कैसे ?'
'मोहल्ले के एक महाराष्ट्रीयन सज्जन मुझे हाथ दिखने आए, सब ठीक-ठाक दिखा, मैंने उन्हें अच्छी बातें कह कर विदा किया लेकिन उसी रात वे संसार से विदा हो गए।'
'अरे !'
'हाँ, मैं उनके अंतिम संस्कार में गया, कई दिनों तक बेचैन रहा कि उनकी मृत्यु के कोई संकेत रेखाओं में नहीं थे, फिर ऐसा क्यो हुआ ? मुझे इस विज्ञान पर ही संदेह होने लगा।'
'फिर ?'
'जिस दिन गंगापूजन का कार्यक्रम था, मैं उनके घर गया और बहुत झिझकते हुए उनकी पत्नी से हाथ दिखने के लिए अनुरोध किया, उन्होंने अपना हाथ दिखा। उनके हाथ की रेखाओं में वैधव्य का प्रबल संकेत था। इससे यह समझ में आया कि केवल व्यक्ति की रेखाएँ ही नहीं, उससे जुड़े अन्य व्यक्तियों के भवितव्य का भी बहुत प्रभाव होता है।' चिपड़े जी ने बताया।
बहुत पुरानी बात है, लगभग ५० वर्ष पूर्व की, बम्बई के एक आभूषण व्यापारी, मेरे बड़े भाई साहब रूप नारायण जी (रायपुर) के दोस्त थे, अपनी नव-विवाहित पत्नी को साथ लेकर बिलासपुर आए. बड़े भाई साहब ने उन्हें चिपड़े जी से मिलवाया. चिपड़े जी ने दोनों का हाथ देखा, चुप रहे. कुछ देर बाद जब नव-विवाहिता वहां से उठकर चली गई तो उन्होंने आभूषण व्यापारी से पूछा- 'जब तुम किसी एक औरत के साथ रह रहे हो तो फिर इस लड़की से शादी क्यों की?'
'वो...वो...' वह हकलाया.
'सच बोलो, मैं जो बता रहा हूँ वह सच है कि नहीं ?'
'सच है.'
'तुम्हें इस तरह दो लोगों की ज़िन्दगी बर्बाद करने का कोई हक़ नहीं है.' चिपड़े जी उस पर नाराज हुए, उसका हाथ देखना बंद कर दिया और दूसरी तरफ मुंह घुमाकर बैठ गए. चिपड़े जी के सामने यदि कोई गलत आदमी पड़ जाता तो उनका चेहरा तन जाता, माथा सिकुड़ जाता और वे रुष्ट हो जाते थे. यद्यपि वे सौम्यता और शिष्टाचार की प्रतिमूर्ति थे लेकिन किसी भी व्यक्ति की गलत बात को बेहद कड़े शब्दों में व्यक्त करते थे. एक घटना बताता हूँ.
मेरी पत्नी माधुरी की हस्तरेखा विज्ञान में बहुत रुचि थी। 'कीरो' से लेकर अनेक देसी-विदेशी भविष्यवक्ताओं की किताबों का अध्ययन उन्होंने दस-पंद्रह वर्षों तक किया और उस विज्ञान को जानने-समझने की कोशिश की। वे अपने परिचितों के हाथ देखती लेकिन किसी को कुछ बताने में संकोच करती और कहती- 'जब तक इस शास्त्र को गहराई से न जाना जाए, कोई भी भविष्यवाणी करना न्यायोचित नहीं है।' सबसे ज़्यादा वे मेरा 'पाम' झाँकती क्योंकि मेरे उनमें असंख्य रेखाओं का जाल है।
'वो...वो...' वह हकलाया.
'सच बोलो, मैं जो बता रहा हूँ वह सच है कि नहीं ?'
'सच है.'
'तुम्हें इस तरह दो लोगों की ज़िन्दगी बर्बाद करने का कोई हक़ नहीं है.' चिपड़े जी उस पर नाराज हुए, उसका हाथ देखना बंद कर दिया और दूसरी तरफ मुंह घुमाकर बैठ गए. चिपड़े जी के सामने यदि कोई गलत आदमी पड़ जाता तो उनका चेहरा तन जाता, माथा सिकुड़ जाता और वे रुष्ट हो जाते थे. यद्यपि वे सौम्यता और शिष्टाचार की प्रतिमूर्ति थे लेकिन किसी भी व्यक्ति की गलत बात को बेहद कड़े शब्दों में व्यक्त करते थे. एक घटना बताता हूँ.
मेरी पत्नी माधुरी की हस्तरेखा विज्ञान में बहुत रुचि थी। 'कीरो' से लेकर अनेक देसी-विदेशी भविष्यवक्ताओं की किताबों का अध्ययन उन्होंने दस-पंद्रह वर्षों तक किया और उस विज्ञान को जानने-समझने की कोशिश की। वे अपने परिचितों के हाथ देखती लेकिन किसी को कुछ बताने में संकोच करती और कहती- 'जब तक इस शास्त्र को गहराई से न जाना जाए, कोई भी भविष्यवाणी करना न्यायोचित नहीं है।' सबसे ज़्यादा वे मेरा 'पाम' झाँकती क्योंकि मेरे उनमें असंख्य रेखाओं का जाल है।
पर्वत, त्रिशूल, 'क्रॉस', चतुर्भुज, त्रिभुज, शंख, जुड़ी रेखाएँ, अधूरी रेखाएँ, उलझी रेखाएँ, टूटी रेखाएँ- मतलब यह- कि जो देखना हो, सब हाज़िर है। आम तौर पर रात को सोने के पूर्व उनका अध्ययन चलता था और साथ-साथ मेरे हाथ की रेखाओं का अवलोकन भी।
एक दिन हम दोनों चिपड़े जी के घर उनसे मिलने गए. मैंने उनसे माधुरी को हस्तरेखा विज्ञान में पारंगत करने का अनुरोध किया तो वे बोले- 'मैं हस्तरेखा विज्ञान भूल चुका हूँ, जब युवा था, बनारस से पढ़कर आया था, तब जानता था.'
'लेकिन आप अभी भी जो देखते हैं, वो क्या है ?' माधुरी ने पूछा.
'यह मैं नहीं जानता लेकिन किसी का हाथ देखते ही मुझे जातक के भूत, वर्तमान और भविष्य के अनेक संकेत समझ में आने लगते हैं.'
'क्या यह 'intuition' है ?'
'हो सकता है लेकिन मुझे कोई सिद्धि प्राप्त नहीं है.' चिपड़े जी बोले.
'जो भी हो, माधुरी को बहुत शौक है, इनका मार्गदर्शन कर दीजिए.' मैंने अनुरोध किया.
'ठीक है, प्रत्येक रविवार की सुबह ८ बजे से लोग यहाँ आते हैं, मैं उनके हाथ देखता हूँ. आप भी आकर बैठिए और चुपचाप देखते-सुनते रहिये और समझने की कोशिश करिये, किन्तु मुझसे कुछ पूछना नहीं और न ही बीच में बोलना है.' वे माधुरी से बोले.
अगले रविवार से माधुरी चिपड़े जी के घर धरना देकर बैठने लगी. उन बैठकों में माधुरी ने जो देखा और सुना, वह अत्यंत विस्मयपूर्ण था !
हर रविवार की सुबह उनके घर में उनके मुरीदों की भीड़ लगना शुरू हो जाती। उनका छोटा सा घर, छोटा सा कमरा, प्रश्नातुर लोग असुविधाजनक स्थिति में भी खड़े रहते और अपनी बारी का इंतज़ार करते। अधिकतर समस्याग्रस्त व्यक्ति होते थे किन्तु कुछ जिज्ञासु भी। समस्याएँ वही जो आम मध्यमवर्गी परिवारों में आम है। एक सज्जन आए, पति-पत्नी के बीच झगड़े से मुक्ति का उपाय पूछने। चिपड़े जी ने उनका हाथ देखा और बोले- 'सारा बवाल तुम्हारे कारण है, तुम झगड़ा शुरू करते हो और मुझसे उपाय पूछने आए हो ?'
'मैं ?' जातक ने पूछा।
'हाँ, तुम।'
'नहीं ऐसा नहीं है।'
'अच्छा...ये बताओ, कल तुमने अपनी पत्नी को क्यों मारा ?'
'उसकी गलती थी, इसलिए।'
'क्या गलती थी ?'
'उसके पापा ने एक मकान उसके नाम किया हुआ है, उसने मुझसे यह बात छुपाई। मुझे कल ही मालूम पड़ा, उसने बहस मुझसे की तो मुझे गुस्सा आया इसलिए मार दिया।'
'तुम अगर बताने लायक पति होते तो वह तुमको अवश्य बताती, तुम ठीक आदमी नहीं हो। यदि तुमको ससुराल से कुछ चाहिए तो उनसे साफ-साफ बोलो, अपनी घरवाली से क्यों मारपीट करते हो, यह गलत बात है। जाओ, अब गड़बड़ नहीं करना, अपनी पत्नी से प्यार किया करो।' चिपड़े जी ने कहा।
एक दिन हम दोनों चिपड़े जी के घर उनसे मिलने गए. मैंने उनसे माधुरी को हस्तरेखा विज्ञान में पारंगत करने का अनुरोध किया तो वे बोले- 'मैं हस्तरेखा विज्ञान भूल चुका हूँ, जब युवा था, बनारस से पढ़कर आया था, तब जानता था.'
'लेकिन आप अभी भी जो देखते हैं, वो क्या है ?' माधुरी ने पूछा.
'यह मैं नहीं जानता लेकिन किसी का हाथ देखते ही मुझे जातक के भूत, वर्तमान और भविष्य के अनेक संकेत समझ में आने लगते हैं.'
'क्या यह 'intuition' है ?'
'हो सकता है लेकिन मुझे कोई सिद्धि प्राप्त नहीं है.' चिपड़े जी बोले.
'जो भी हो, माधुरी को बहुत शौक है, इनका मार्गदर्शन कर दीजिए.' मैंने अनुरोध किया.
'ठीक है, प्रत्येक रविवार की सुबह ८ बजे से लोग यहाँ आते हैं, मैं उनके हाथ देखता हूँ. आप भी आकर बैठिए और चुपचाप देखते-सुनते रहिये और समझने की कोशिश करिये, किन्तु मुझसे कुछ पूछना नहीं और न ही बीच में बोलना है.' वे माधुरी से बोले.
अगले रविवार से माधुरी चिपड़े जी के घर धरना देकर बैठने लगी. उन बैठकों में माधुरी ने जो देखा और सुना, वह अत्यंत विस्मयपूर्ण था !
हर रविवार की सुबह उनके घर में उनके मुरीदों की भीड़ लगना शुरू हो जाती। उनका छोटा सा घर, छोटा सा कमरा, प्रश्नातुर लोग असुविधाजनक स्थिति में भी खड़े रहते और अपनी बारी का इंतज़ार करते। अधिकतर समस्याग्रस्त व्यक्ति होते थे किन्तु कुछ जिज्ञासु भी। समस्याएँ वही जो आम मध्यमवर्गी परिवारों में आम है। एक सज्जन आए, पति-पत्नी के बीच झगड़े से मुक्ति का उपाय पूछने। चिपड़े जी ने उनका हाथ देखा और बोले- 'सारा बवाल तुम्हारे कारण है, तुम झगड़ा शुरू करते हो और मुझसे उपाय पूछने आए हो ?'
'मैं ?' जातक ने पूछा।
'हाँ, तुम।'
'नहीं ऐसा नहीं है।'
'अच्छा...ये बताओ, कल तुमने अपनी पत्नी को क्यों मारा ?'
'उसकी गलती थी, इसलिए।'
'क्या गलती थी ?'
'उसके पापा ने एक मकान उसके नाम किया हुआ है, उसने मुझसे यह बात छुपाई। मुझे कल ही मालूम पड़ा, उसने बहस मुझसे की तो मुझे गुस्सा आया इसलिए मार दिया।'
'तुम अगर बताने लायक पति होते तो वह तुमको अवश्य बताती, तुम ठीक आदमी नहीं हो। यदि तुमको ससुराल से कुछ चाहिए तो उनसे साफ-साफ बोलो, अपनी घरवाली से क्यों मारपीट करते हो, यह गलत बात है। जाओ, अब गड़बड़ नहीं करना, अपनी पत्नी से प्यार किया करो।' चिपड़े जी ने कहा।
माधुरी ने मुझे जब उपरोक्त घटना बताई तो मैं आश्चर्यचकित हो गया कि आज के युग में भी लोग अपनी पत्नी को पीटते हैं. माधुरी जी अलग कारण से चकित थी, वे बोली, 'मैंने हस्तरेखा विज्ञान की बहुत किताबें पढ़ी हैं लेकिन किसी में भी ऐसी रेखा का ज़िक्र नहीं है जो यह बताए कि कल तुमने अपनी पत्नी को क्यों मारा?
उनकी बात का विश्वास करने और उनका आदर करने वालों की संख्या बताना असंभव हैं। माधुरी ने उनके साथ पाँच-छः 'सिटिंग' की। वहाँ उन्हें अनेक व्यक्ति, विभिन्न चरित्र, किस्म-किस्म के हाथ और विविध समस्याओं को सुनने-समझने का अवसर मिला। घरेलू व्यस्तता के चलते उन्होंने चिपड़े जी के घर जाना छोड़ दिया और कुछ समय बाद हस्तरेखा का अध्ययन भी त्याग दिया। उनका आकलन था- 'चिपड़े जी के पास अधिकतर समस्याग्रस्त लोग आते हैं और उनसे मिलकर अपने चेहरे पर राहत का भाव लेकर वापस लौटते हैं । वे केवल हस्तरेखा विशेषज्ञ नहीं हैं, वे एक 'सोशल वर्कर' हैं, कुशल मनोवैज्ञानिक चिकित्सक हैं।'
मेरी उनसे अक्सर मुलाक़ात होती थी, लेकिन हर बार उनके सामने अपना हाथ नहीं बढ़ाता था। कभी कोई गंभीर समस्या सर पर आ जाती थी तब ही उनका मार्गदर्शन लेता। उन्होने मेरे 28 वर्ष की आयु में विवाह होने की भविष्यवाणी की थी, केवल वही सही निकली, शेष गलत। मेरे विवाह के बाद मैंने उनसे पूछा था- 'आठ वर्ष पूर्व आपने मेरा हाथ देखकर बताया था कि मेरा विवाह हो चुका है और एक बच्चा भी, लेकिन वह दोनों बात गलत थी, ऐसा कैसे हुआ ?'
'मुझे याद है, तुम्हारी रेखाएँ वही बता रही थी। संभवतः तुम्हारे पुण्य कार्यों के कारण वह विवाह नहीं हुआ। यदि वह विवाह हो गया होता तो तुम्हें अपनी पहली पत्नी की मृत्यु का वियोग सहना पड़ता, वैसे संकेत तुम्हारे हाथ में थे।' उन्होंने रहस्योद्घाटन किया।
उन्होंने अपने जीवनकाल के 50 वर्षों तक लोगों के हाथ देखकर जनसेवा की और कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया। उनकी प्रतिभा और ज्ञान के बारे में कितना लिखूं ? फिलहाल समझने के लिए आपको यह बता रहा हूँ कि वे आधुनिक त्रिकालदर्शी थे।
मधुकर राव चिपड़े अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके मुरीद उन्हें अब भी बेहद शिद्दत से याद करते हैं।
============
No comments:
Post a Comment